नई दिल्ली। एक समय था जब लोग पेड़ों की घनी छांव में बैठकर सुकून से जीवन बिताते थे और हर साल नए पौधे लगाकर उन्हें अपने बच्चों की तरह संवारते थे। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। लगातार बढ़ती गर्मी और घटते पेड़ मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, जिस धरती पर कभी अप्रैल का तापमान 32-33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता था, आज वही तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण वनों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ता वायु प्रदूषण है।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर केवल सरकारी प्रयास ही काफी नहीं हैं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। पेड़ों की कटाई पर रोक लगाना, अधिक से अधिक पौधारोपण करना और प्रदूषण को नियंत्रित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।

हालांकि, हर साल ‘पृथ्वी दिवस’ जैसे आयोजनों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाती है, लेकिन अगर यह प्रयास केवल औपचारिकता बनकर रह जाएं, तो उनका कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ेगा। इसलिए जरूरी है कि हम आज से ही प्रकृति के संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि भविष्य सुरक्षित रह सके।