देवरिया। लार विकासखंड के ग्राम सभा कुंडावलतारा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा व्यास आचार्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी जी महाराज ने आध्यात्मिक जीवन और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य सांसारिक विषयों में उलझा रहेगा, तब तक वह सच्चे आनंद की अनुभूति नहीं कर सकता। आत्मा और परमात्मा के मिलन में ही परमानंद की प्राप्ति होती है।
कथा व्यास ने मन की शुद्धि, सत्संग और शास्त्रों के अध्ययन की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि अज्ञानता ही मनुष्य के सभी दुखों का मूल कारण है। उन्होंने कपिल भगवान द्वारा माता देवहूति को दिए गए उपदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि मन ही बंधन और मुक्ति का कारण है।
कथा के दौरान सती चरित्र, ध्रुव चरित्र और जड़ भरत चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।










