देवरिया। जनपद के ग्राम सभा कुंडावल तारा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास परम पूज्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी जी महाराज ने भक्ति और सत्य के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला।
कथा का शुभारंभ प्रथम स्कंध के मंगलाचरण से किया गया। कथा व्यास ने बताया कि जब तक जीवन में आचरण मंगलमय नहीं होगा, तब तक भक्ति का आरंभ संभव नहीं है। भक्ति प्राप्त करने के लिए बुद्धि की शुद्धता आवश्यक है और इसके लिए सतत कथा एवं सत्संग में जुड़े रहना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि मंगलाचरण का पहला श्लोक कर्मकांड, दूसरा उपासना और तीसरा भक्ति के दिव्य फल को दर्शाता है। परमात्मा की प्राप्ति के लिए जानना और मानना दोनों आवश्यक हैं।
कथा के दौरान सृष्टि की उत्पत्ति, शुकदेव स्वामी का आगमन तथा भागवत के दस लक्षणों का निरूपण करते हुए विराट पुरुष का भी वर्णन किया गया।
इस अवसर पर कथा के मुख्य यजमान अशोकनाथ तिवारी, विश्वेश्वरनाथ तिवारी, लक्ष्मणनाथ तिवारी, विजयनाथ तिवारी, राजबहादुर नाथ तिवारी, योगेश्वरनाथ तिवारी, पशुपतिनाथ तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।










