ढोल की लयबद्ध थाप, चनिया-चोलियों के रंग, माँ दुर्गा के मंत्रों की गूँज शारदीय नवरात्रि सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है जो हर भारतीय के दिल में भक्ति और ऊर्जा भर देती है। यह वही समय है जब प्रकृति, मन और ब्रह्मांड एक स्वर में शक्ति की उपासना के लिए संरेखित होते हैं।

शारदीय नवरात्रि 2026 सोमवार, 12 अक्टूबर से शुरू होकर बुधवार, 21 अक्टूबर को समाप्त होगी।
इन नौ दिनों में नवदुर्गा के प्रत्येक रूप की आराधना की जाती है और दसवें दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा मनाया जाता है।

शारदीय नवरात्रि 2026: तिथियाँ और मुहूर्त

  • नवरात्रि प्रारंभ: 12 अक्टूबर 2026 (सोमवार)

  • नवरात्रि समाप्ति: 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार)

  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 11 अक्टूबर 2026, सुबह 09:07 बजे

  • प्रतिपदा तिथि समाप्त: 12 अक्टूबर 2026, सुबह 07:12 बजे

  • दुर्गा अष्टमी: 19 अक्टूबर 2026

  • विजयादशमी/दशहरा: 21 अक्टूबर 2026

शहरवार घटस्थापना मुहूर्त (12 अक्टूबर 2026)

स्थानीय सूर्योदय के अनुसार समय में हल्का अंतर संभव है।

शहर घटस्थापना मुहूर्त
नई दिल्ली 6:20 – 10:15
मुंबई 6:33 – 10:48
बैंगलोर 6:10 – 10:24
हैदराबाद 6:12 – 10:28
पुणे 6:30 – 10:45
कोलकाता 5:32 – 9:30
चेन्नई 6:00 – 10:18
अहमदाबाद 6:38 – 10:55
जयपुर 6:28 – 10:25

9 दिन, 9 देवियाँ, 9 रंग

नवरात्रि में हर दिन एक देवी और उससे जुड़े रंग को समर्पित होता है।
2026 में नवरात्रि सोमवार से शुरू होने के कारण पहला रंग सफेद रहेगा।

दिन देवी रंग महत्व
1: माँ शैलपुत्री सफेद पवित्रता और शांति  
2: माँ ब्रह्मचारिणी लाल ऊर्जा और संकल्प  
3: माँ चंद्रघंटा रॉयल ब्लू समृद्धि और सौम्यता  
4: माँ कुष्मांडा पीला सकारात्मकता और प्रकाश  
5: माँ स्कंदमाता हरा विकास और जीवन  
6: माँ कात्यायनी ग्रे संतुलन और शक्ति  
7: माँ कालरात्रि संतरी ज्ञान और ऊर्जा  
8: माँ महागौरी मोर हरा सौम्यता और करुणा  
9: माँ सिद्धिदात्री गुलाबी प्रेम और सद्भाव  

शारदीय नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

इस नवरात्रि से जुड़ी दो प्रमुख पौराणिक कथाएँ हैं:

1. भगवान राम की विजय कथा

रामायण के अनुसार, राम ने रावण वध से पहले नौ दिनों तक माँ दुर्गा की उपासना की थी।
दसवें दिन (दशहरा) उन्हें विजय मिली।

2. महिषासुर मर्दिनी की कथा

माँ दुर्गा ने भैंसे के रूप वाले राक्षस महिषासुर का वध नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद किया।
इसलिए नवरात्रि शक्ति, सत्यम और धर्म की विजय का उत्सव है।

नवरात्रि पूजा विधि: चरण-दर-चरण

1. घटस्थापना (पहला दिन)

  • स्वच्छ घर में पूजा स्थान बनाएँ

  • मिट्टी में जौ बोएँ

  • कलश में रोली, चावल, सिक्का, सुपारी रखें

  • नारियल और आमपत्र लगाएँ

  • देवी का आवाहन करें

2. दैनिक पूजा

  • सुबह दीपक जलाएँ और देवी को फूल अर्पित करें

  • दुर्गा चालीसा, सप्तशती या मंत्र पाठ करें

  • फलाहार, हल्का भोजन और संयम का पालन करें

3. कन्या पूजन (अष्टमी/नवमी)

  • 9 कन्याओं को घर बुलाकर भोजन कराएँ

  • चुनरी, उपहार और प्रसाद दें

  • इसे नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है

स्मार्टपूजा मिनी व्रत गाइड

  • सेंधा नमक का प्रयोग

  • फल, खीर, मखाना, साबूदाना व्रत भोजन

  • ओवरईटिंग से बचें

  • जल ज्यादा पिएँ

  • मन में शांत भाव रखें

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. क्या नवरात्रि में प्याज-लहसुन खाना चाहिए?

परंपरागत रूप से निषेध है।

2. क्या कोई भी व्यक्ति व्रत रख सकता है?

हाँ, यह सभी के लिए शुभ है। स्वास्थ्य समस्या हो तो हल्का व्रत रखें।

3. क्या रोज कलश के सामने आरती करनी चाहिए?

हाँ, सुबह-शाम दीपक अवश्य जलाएँ।

4. कन्या पूजन किस दिन किया जाता है?

अष्टमी या नवमी में, दोनों में से किसी एक दिन।

5. क्या नवरात्रि में यात्रा कर सकते हैं?

हाँ, बस रोज देवी स्मरण और पूजा की सरल विधि जारी रखें।